शराबबंदी को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने किया जनता से विश्वासघात-भरत वर्मा

MD भारत न्यूज, राजनांदगांव। दुर्ग शहर में भेंट मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा कही गई बातों को भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भरत वर्मा ने प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात बताया है। वर्मा ने कहा कि सरकार बनने के पहले ही गंगाजल हाथ में लेकर शराबबंदी की बात कहने वाले कांग्रेस सरकार पिछले साढे़ चार सालों से शराबबंदी को लेकर सिर्फ अध्ययन ही कर रहा है।

भेंट मुलाकात के दौरान दुर्ग की एक महिला ने मुख्यमंत्री से शराबबंदी की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री का यह कहना कि जनता शराब पीना बंद कर दे, शराब दुकान अपने आप बंद हो जायेगी जो हास्यप्रद है। शराब के नशे में हत्या, आत्महत्या के साथ ही सड़क हादसों में भी खून बह रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के दो अलग-अलग आंकड़े ने शराब की साईड इफेक्ट की एक और तस्वीर पेश की है, जिससे साबित हो रहा है कि शराब का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है। उन्होनें कांग्रेस के विपक्ष में रहते शराबबंदी की मांग को केवल सत्ता प्राप्ति के लिये एक पाखंड बताया। झूठे वादे कर प्रदेश के मतदाताओं के साथ शराबनीति पर भवनात्मक छलावा किया गया। उन्होने कहा कि प्रदेश की जनता के गाढ़ी कमाई को शराब के माध्यम से लूट कर कर्ज में डूबे छत्तीसगढ़ की नैया पार करना कांग्रेस की मंशा है। आज छत्तीसगढ़ में शराब के कारण रोज महिलायें घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है। छः दिन पहले भिलाई के पुलगांव क्षेत्र में स्थित ग्राम नगपुरा में एक महिला ने अपने छः माह के बच्चे को तालाब में फेंक दिया था, जिसका कारण शराब ही है। उसका पति शराबी था और महिला से मार-पीट करता था, घर में खर्च भी नहीं देता था, जितना कमाता था वह शराब में खर्च कर देता था। ऐसे ही हजारो और उदाहरण है, जिसका मुख्य कारण शराब है।

 

 

श्री वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते है शराबबंदी करने पर लोग जहरीली शराब पीकर मरते है, लेकिन शराब के नशे में प्रतिदिन सैकड़ों लोग दुर्घटना में जान गंवा रहे है। युवा शराब के लत में पड़कर गंभीर अपराध को अंजाम दे रहे है। महिलाये घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है, इस पर मुख्यमंत्री आंख बंद कर बैठे है। छत्तीसगढ़ भी नशा के आगोश में धधक रहे है।

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