आनंद मार्ग का छत्तीसगढ़ राज्य सेमीनार संपन्न, तांडव-कोशिकी नृत्य साधना और ब्रह्मोपलब्धी में धर्म चर्चा

MD भारत न्यूज रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सेमीनार के ‌समापन व्याख्यान में मुख्य प्रशिक्षक आचार्य महादेवानंद अवधूत ने श्रीश्री आनंद मूर्ति जी के आध्यात्मिक दर्शन के रहस्योंद्घाटित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य ब्रह्मोपलब्धी केवल आध्यात्मिक अनुशीलन से ही संभव है। सांसारिक इच्छाओं की कामना से मनुष्य की केवल वासनाओं की पूर्ति हो सकती है।

आचार्य महादेवानंद ने मार्गी धर्म साधकों को साधना और आध्यात्मिक अनुशीलन पर केंद्रित प्रवचन में धर्म के पाखंड और सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया।
धर्म का कार्पोरेट बाजार खड़ा किया जा रहा है। जबकि प्रत्याहार साधना के चार स्तरों से जागतिक बोध होगा और ईश्वर प्राणिधान से परम पुरुष की प्राप्ति होगी। ब्रह्मोपलब्धी के लिए मनुष्य को क्षुद्र और संकीर्ण मनोभावों से उठना होगा। तंत्र और योग के द्वारा ही व्यक्ति क्षुद्र और संकीर्ण मनोभावों से ऊपर उठकर परम चैतन्य को प्राप्त कर सकता है।
सेमीनार का शुभारंभ प्रभात फेरी और ध्वज वंदना से हुआ। फिर भगवान श्री श्री आनंद मूर्ति जी प्रदत साधना और ध्यान पद्धति का साधकों ने अभ्यास किया। डायोसिस सेक्रेटरी आचार्य अर्पितानंद अवधूत ने तांडव और कोशिकी नृत्य का अभ्यास के साथ ही इसके तकनीकी, योगिक महत्त्व को समझया।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आनंद मार्ग और छत्तीसगढ़ समाज ने 80-90 के दशक में समाज के नवनिर्माण और पुनरुद्धार और पृथक राज्य निर्माण आंदोलन में क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी। उन दिनों की गौरवशाली परंपरा को पुनर्समीक्षा करते हुए साधक परिवार द्वारा सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में आनंद मार्ग के सामाजिक आध्यात्मिक दर्शन के प्रचार-प्रसार की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। रायपुर भुक्ति के भुक्ति प्रधान श्री चंद्रशेखर चन्द्राकर ने प्रत्येक जिला‌ एवं ब्लॉक में प्रशिक्षकों और ऑर्गनाइजर के नाम की घोषणा की। आचार्य अर्पितानंद अवधूत ने संगठनात्मक गतिविधियों और भुक्ति प्रधान के चुनाव की जानकारी दी।
प्रतिष्ठित समाजसेवी डॉ श्री सत्यजीत साहू ने श्री श्री आनंद मूर्ति जी और आनंद मार्ग दर्शन पर अपने विचार रखे। आचार्य एच एल ब्रोकर, अवधुतिका आनंद रतनदीपा ने भी सभा को सम्बोधित किया। सेमिनार के प्रशिक्षक आचार्य चित्शिवानन्द अवधूत ने समापन वक्तव्य और आभार प्रदर्शन किया।
सेमीनार में वरिष्ठ आचार्य गण मन्नतमानंद अवधूत, नित्याज्ञानंद अवधूत, उत्यागानंद अवधूत, विशुद्धानंद अवधूत, परिवोधाननंद, करुणकृष्णानंद, आनंद नीतिशुद्धा, आनंद कृष्णमित्रा, आनंद सुमंत्रा आचार्या मुख्य रूप से प्रतिभागी थे। आनंद मार्गी‌ परिवार के इंद्रजीत साहू, भुवनेश्वर, सतीश वर्मा, जयेश, यदुनाथ, निर्मल, हरीश, ध्यानेश, संदीप, सिद्दार्थ देव, अभिषेक सिंह, गंगा दीदी, मालती दीदी ने अपनी महिला समाज की टीम के कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए महत्वपूर्ण दायित्वों को सफलता पूर्वक संपन्न किया।

 

 

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